ब्रेकिंग न्यूज़ नई दिल्ली। प्रधानमंत्री इमरान खान बब्वर शेर है : नवजोत सिंह सिद्धू।                भोपाल। अयोध्या मामले के फैसले के बाद दिग्विजय के टवीट पर बड़ा विवाद।                शाहजहानाबाद। चिन्मयानंद पर यौन शोषण का आरोप लगाने वाली छात्रा को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया।                मप्र / राज्य सरकार ने वैट 5% बढ़ाया, भोपाल में आज से पेट्रोल 2.91 रु. और इंदौर में 3.26 रुपए महंगा                इंदौर। मैं किसी श्वेता को नहीं पहचानता, सबके नाम उजागर होने चाहिए : पूर्व गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह                  
प्राइवेट स्कूल की मनमानी रोकने कानून तो बना पर कार्रवाई नहीं होने के कारण पालक इनकी मनमर्जी के शिकार

भोपाल ‚ (सुलेखा सिंगोरिया) निजी स्कूल मे फीस, यूनिफ़ोर्म व कॉपी किताब के मामले मे मनमानी को रोकने के लिए मध्यप्रदेश मे कानून तो बना है, लेकिन सही से नियम नहीं बनने की वजह से निजी स्कूलो पर अभी भी सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है,जिसके चलते अभिभावक इनकी मनमर्जी के शिकार हो रहे है। राज्य सरकार निजी विधायक फीस अभिनियम 2018 मे लागू कर चुकी है, लेकिन स्कूलो के विरोध की वजह से इसके नियम लागू नहीं हो पाये है, इसका नतीजा यह हुआ की अभिभावक अभी भी स्कूलो की मनमानी से परेशान हैं, कानून का निजी स्कूलो ने काफी विरोध किया था | सीबीएसई ने साफ किया है कि सीबीएसई स्कूलो कि मान्यता की ज़िम्मेदारी भी राज्य सरकार की होगी। सीबीएसई केवल पढ़ाई-लिखाई के स्तर को ही जाचेगी। स्कूल की आधारभूत संरचना से जुड़े सभी मानको की जाँच जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) की अध्यक्षता मे गठित कमेटी करेगी। इस निर्देश को निकले करीब दो महीने हो गए, लेकिन अभी तक डीईओ ने सीबीएसई स्कूलो की प्राचार्यो की न तो बैठक बुलाई और न ही समिति बनाकर निरीक्षण किया। निजी स्कूलो से परेशान अभिभावकों ने ज्ञापन दे किया मनमानी पर विरोध निजी स्कूलो की मनमानी से परेशान अभिभावक ने मंगलवार को कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है।इसमे निजी स्कूलो मे फीस नियंत्रय कानून, स्कूल बस की फीस मे प्रशासन का नियंत्रण, स्कूलो मे निजी प्रकाशको की किताबों को बैन कर एनसीईआरटी की किताबे लागू करने ब स्कूल प्रबंधन द्वारा चुनिंदा दुकान से शैक्षणिक सामग्री खरीदने का दबाव हटाने की मांग की गयी। फीस अभिनियम प्रारूप पर 10 हज़ार आपत्तिया लगाई थी। पालक महासंघ ने बताया की शासन ने फीस अभिनियम बनाने के लिए जो प्रारूप तैयार किया था, उस पर 10 हज़ार से अधिक आपत्तिया लगाई गई थी, शासन की और से प्रारूप की अंतिम रूप देने के लिए 25 जुलाई 2018 तक दावे- आपत्ति मांगे गए थे। कानून से जुड़े नियम का भी प्रारूप बनाया गया था, निजी स्कूल पर नियंत्रण करने के लिए जिला स्तर पर कमेटी बनाई गई थी। लेकिन कनेटी की एक भी न बैठक हुई और न ही निरीक्षण किया गया। तो उग्र आंदोलन करेगे सीबीएसई स्कूलो मे फीस, यूनिफ़ोर्म और कॉपी-किताबों पर निजी स्कूल की मनमानी कीमत वसूली कर रहे है। जिससे अभिभावक को कई परेशानी उठानी पड़ती है, इस पर रोक लगाने के लिए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया। अगर कोई कार्रवाई नहीं होती है तो भविष्य मे हम उग्र आंदोलन करेंगे । अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई जिले मे करीब 70 से अधिक सीबीएसई स्कूल है। जिसमे सभी स्कूल अपने अपने मनमानी करते है लेकिन अभी तक जिला शिक्षा विभाग मे सीबीएसई स्कूलो की जितनी भी शिकायते आई है। एक भी मामले मे डीईओ ने कोई कार्रवाई नहीं की है। तभी तो जिले के सीबीएसई स्कूल यूनिफ़ोर्म,फीस या कॉपी-किताब को लेकर मनमानी करते रहते है। 2018 मे डीईओ आ डीपीओ के पास 50 से अधिक मामले पहुंचे है, लेकिन एक भी मे कोई कार्रवाई नहीं की गई। जिसके चलते आम आदमी को परेशानियों का सामने करना पड़ता है।

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प्रधान संपादक सहायक-संपादक समाचार संपादक
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