ब्रेकिंग न्यूज़ क्रिकेट। धोनी और जाधव ने निराश किया : सचिन तेंदुलकर।                इंदौर। केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर से हटाएगी धारा 370 : कैलाश विजयवर्गीय।                चैन्नई। इंदिरा गांधी को अरेस्ट करने वाले पूर्व डीजीपी का निधान।                क्रिकेट। आक्रामक अपील, विराट पर मैच फीस का 25% जुर्माना।                  
मध्यप्रदेश मे कमल खिला, नाथ मुरझाये।


भोपाल। (सैफुद्दीन सैफी) मध्य प्रदेश मे सभी 29 लोक सभा सीटो पर वोटो की गिनती का काम जारी हैं। आज 2 बजे तक मत गणना के अनुसार प्राप्त संकेतो से पता चलता है, कि मध्यप्रदेश मे मोदी लहर कॉंग्रेस का सुपड़ा साफ करने जा रही हैं। पर जो सबसे हैरतनाक बात यह है की कॉंग्रेस पार्टी के कद्दावर नेता जिन मे भोपाल से चुनाव लड़ रहे पूर्व मुख्य मंत्री दिग्विजय सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादितिय सिंधिया, प्रदेश अध्यक्ष मुकेश यादव सहित कई नेताओ को बीजेपी के उम्मीदवार  करारी शिकास्त देते नज़र आ रहे है। अगर रुझान  नतीजो मे तब्दील होते है, तो प्रदेश भारतीय जनता पार्टी मध्य प्रदेश मे 29 मे से 28 सीटो जीतने मे सफ़ल होती दिखाई दे रही हैं। और कॉंग्रेस को सिर्फ छिंदवाड़ा लोकसभा सीट पर ही संतोष करना पड सकता हैं।  

कॉंग्रेस की करारी हार का कारण क्या?

अभी तीन महीने पूर्व ही 15 साल पुरानी शिवराज सरकार को पटकनी देकर सत्ता मे आयी कमलनाथ की सरकार लोकसभा चुनाव मे भाजपा से क्यो पटखनी खा गई। इसके पीछे का करण क्या है? अब ये मंथन तो प्रदेश कॉग्रेस नेतृत्व करेगा ही मगर प्रारम्भिक तौर पर जो कारण नज़र आया हैं, वो यह की प्रदेश मे मुख्य मंत्री कमलनाथ सहित प्रदेश के अन्य नेता मध्य प्रदेश मे अपनी सरकार बनने के बाद जिस प्रकार फूल के कुप्पा हुई जा रहे थे, और  इस गलतफहमी के शिकार थे  कि  विधानसभा  फतह कर ली लोकसभा भी जीत जाएगे। मुख्य मंत्री कमलनाथ कि यह गलतफहमी या खुशफहमी ने ही प्रदेश मे कॉंग्रेस को हाशिये पर ला दिया।  यह कहना गलत नहीं होगा, कि प्रदेश कॉंग्रेस ने लोकसभा चुनाव को गंभीरता पूर्वक लड़ा ही नहीं। कमलनाथ छिदवाड़ा मे लगे रहे अपने बेटे को जिताने के लिए, ज्योतिरादित्य सिंधिया गुना और ग्वालियर तक सीमित रहे, और दिग्विजय सिंह का  ध्यान पूरा भोपाल मे केंद्रित रहा। लिहाजा पूरे प्रदेश मे  कॉंग्रेस अपने उम्मीवारों के पक्ष मे जिताऊ माहौल बनाने मे नपुंसक साबित हुई।  

कॉंग्रेस का मीडिया सेंटर भी विफल रहा, ओझा कि अकड़ ने मीडिया को नाराज किया-

गत विधान सभा चुनाव मे जिस दमदारी से मीडिया सेंटर ने  पूर्व शिवराज सरकार के कार्य कलापों को विभिन्न संचार माध्यमओ से और प्रिंट मीडिया के माध्यम से उजागर किया उसका लाभ कॉंग्रेस को विधान सभा चुनाव मे मिला था। मगर इस लोकसभा चुनाव मे कॉंग्रेस के मीडिया सेंटर कि भूमिका बहुत हास्यपद रही। कॉंग्रेस पार्टी की मीडिया  प्रभारी शोभा ओझा का मीडिया कर्मियों से तुनक, मिजाजी और असहयोगअत्मक रवैया के कारण कॉंग्रेस के पक्ष मे प्रचार- प्रसार को लेकर कॉंग्रेस कि रणनीति फ्लॉप शो साबित हुई, नतीजा सामने हैं कि कॉंग्रेस लोकसभा चुनाव मे चारो खाने चित होने जा रही हैं।   

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प्रधान संपादक सहायक-संपादक समाचार संपादक
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