ब्रेकिंग न्यूज़ ग्वालियर। यूनियन बैंक मे खाते से 60 लाख की ठगी,कोर्ट के निर्देश पर एफआईआर।                जबलपुर। बालक से दुष्कृत्य करने वाले को 10 साल सश्रम कारावास।                भोपाल। सिंधिया के ब्यान पर सज्जन सिंह बोले- सीएम, मंत्री और ब्यूरोक्रेसी अलग-अलग।                नई दिल्ली। एसबीआई के ऑनलाइन ट्रांजेक्शन पर चार्ज खत्म।                अहमदाबाद। एडीसी बैंक मानहानि केस मे राहुल गांधी को मिली जमानत।                इंदौर। रेलवे मे रद्द टिकटों से कमाए 1.536 करोड़ रू॰।                  
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भोपाल।(सुलेखा सिंगोरिया) पुलिस प्रशासन के लापरवाही और मनमानी के किस्से इतने हैं कि अगर गिनती की जाये तो शायद समय कम पड़ जाएगा। दिन व दिन तेज़ी से बड़ते अपराधो का आधा जिम्मेदार पुलिस प्रशासन ही हैं ऐसा कहना गलत नहीं होगा। हालही मे 18 जून कि रात मंगलवार को फिर से पुलिस का एक निर्दयतापूर्ण व्यवहार सामने आया हैं। जहां शिवम मिश्रा (25) नामक युवक के साथ हिंसक रूप से मारपीट करने के कारण उसकी मौत हो गई हैं। दरअसल, शिवम के दोस्त गोविंद ने बताया कि मंगलवार रात को करीब सवा 11 बजे। मै और शिवम खजूरी सड़क स्थित ढाबे पर खाना खाने जा रहे थे। लालघाटी से आगे कब्रिस्तान के पास बीआरटी कॉरिडोर मे शिवम की एसयूवी रेलिंग से टकरा गई। एयरबैग खुल गए थे, इसलिए बच गए। लोगो मे डायल 100 को बुला लिया। पुलिसवालो मे आते ही हम पर चिल्लाना शुरू कर दिया। हमने कहा, हमे अस्पताल ले चलो, छाती मे दर्द हो रहा हैं। लेकिन पुलिस ने नहीं सुनी और हमे लालघाटी चौकी ले गए। यहाँ हम दोनों को खूब पीटा। फिर बैरागढ़ थाने ले गए। यहाँ भी पीटा। शिवम बोलता रहा मुझे तकलीफ हो रही हैं, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। शिवम को बाहर निकाला और बोले कागज कार्रवाई करनी हैं। कुछ देर बाद में बाहर आया तो शिवम बाहर नहीं था। पहले हमीदिया फिर राजदीप अस्पताल पहुंचा। लेकिन शिवम का पता नहीं चला। थाने के पीछे सिविल अस्पताल गया तो पता चला की शिवम अब नहीं रहा। इससे पहले भी मंडवा बस्ती मे नौ साल कि मासूम कि हत्या मे भी पुलिस कि लापरवाही और परिजनो से अपशब्द का इस्तेमाल करने कि बात सामने आई थी। ऐसे और भी कई केसेस है जहां पुलिस कर्मी अपनी बर्दी कि धोंस दिखाकर अपनी मनमानी करते हैं। पुलिस जनता कि सेवा के लिए है या जनता के साथ ऐसे बेरहमी, मनमाना व्यवहार करने के लिए? प्रशासन का इस पर क्या कहना हैं?

 

पुलिस ने ली है हमारे बच्चे की जान, पीड़ित परिवार का आरोप.............

परिजनो का आरोप है कि शिवम कि मौत पुलिस के द्वारा बेरहमी से की गई मारपीट के कारण हुई हैं। हमारा बेटा बार बार पुलिस से  अस्पताल ले जाने कि गुजारिश करता रहा, लेकिन पुलिस उसे बेदर्दी से मारती रही। इतना मारा कि उसके जान निकल गई। कहा कि- शिवम के गले मे दो सोने की चैन व मोबाइल फोन था। पुलिस ने सब रख लिया। शिवम को रिहासत मे लेने की जानकारी परिवार वाली को नहीं दी। और न ही उसे फोन रिसीव करने दिया। साथ ही शिवम के दोस्त गोविंद मे बताया कि शिवम ने बिल्कुल भी खराब नहीं पी हुई थी। पुलिस ने अपने आप को बचाने के लिए उसके मुंह मे खराब डाली हैं।

 

भोपाल, आईजी, योगेश देशमुख पाँच पुलिसकर्मी सस्पेंड किए... मामला सही तरीके से हैंडल किया जा सकता था, हमने इस मामले से जुड़े टीआई समेत पाँच पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया हैं। इस मामले न्यायिक जांच कारवाई कि जा रही हैं।

मुख्यमंत्री, कमलनाथ.....शिवम की मौत कि घटना की जांच के आदेश न्यायिक ने दे दिये हैं। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे शक्त से शक्त  सजा दी जाएगी। परिवार के साथ न्याय होगा।

पू॰ मुख्यमंत्री, शिवराज सिंह....पुलिस प्रशासन निरंकुश हो गया हैं। सरकार की संवेदनाए मर गई हैं। ऐसा अपराध कि युवक को पीट-पीट कर मार दे।

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प्रधान संपादक सहायक-संपादक समाचार संपादक
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