ब्रेकिंग न्यूज़ नई दिल्ली। प्रधानमंत्री इमरान खान बब्वर शेर है : नवजोत सिंह सिद्धू।                भोपाल। अयोध्या मामले के फैसले के बाद दिग्विजय के टवीट पर बड़ा विवाद।                शाहजहानाबाद। चिन्मयानंद पर यौन शोषण का आरोप लगाने वाली छात्रा को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया।                मप्र / राज्य सरकार ने वैट 5% बढ़ाया, भोपाल में आज से पेट्रोल 2.91 रु. और इंदौर में 3.26 रुपए महंगा                इंदौर। मैं किसी श्वेता को नहीं पहचानता, सबके नाम उजागर होने चाहिए : पूर्व गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह                  
पशुपतिनाथ मंदिर के भंडारे मे ....श्रद्धालुओ को मिल सके पेट भर भोजन इसके लिए आधार कार्ड लागू।

मंदसौर। मंदसौर स्थित चर्चित पशुपतिनाथ मंदिर में भंडारे के लिए आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसा करने वाला यह देश का पहला मंदिर है। प्रशासन ने ऐसा स्थानीय लोगों को भंडारे से दूर रखने के लिए किया गया है। दरअसल, मंदिर की प्रबंध समिति ने कलेक्टर मनोज पुष्प के आदेश पर बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए इसी महीने एक अगस्त से नियमित भंडारे की व्यवस्था की थी। 1500 साल पुरानी अष्टमुखी प्रतिमा के दर्शन के लिए सामान्य दिनों में रोजाना देशभर से औसतन 300 से 500 लोग पहुंचते हैं। पूरे सावन महीने में 1 लाख से अधिक श्रद्धालु यहां आते हैं। मंदिर समिति के प्रबंधक राहुल रुनवाल कहते हैं कि भंडारे में 300 लोगों के लिए बना भोजन रोज डेढ़ घंटे में ही खत्म होने लगा। लेकिन बाहर से आए श्रद्धालुओं को इसका फायदा नहीं मिल पा रहा था। मंदिर समिति ने पड़ताल की तो पता चला कि आसपास के स्थानीय लोग ही भोजन चट कर जाते हैं। कुछ लोगों ने तो अपने घरों में खाना ही बनाना बंद कर दिया है। इसके बाद मंदिर प्रशासन ने आधार लागू करने का फैसला लिया। यह व्यवस्था लागू होने के बाद मंदिर में भोजन करने वाले लोगों की संख्या आधी रह गई है। कलेक्टर मनोज पुष्प ने बताया कि फ्री भोजन व्यवस्था बाहरी श्रद्धालुओं के लिए है। इसका लाभ स्थानीय लोग लेने लगे थे। इससे व्यवस्था बिगड़ रही थी। अगर किसी के पास आधार नहीं है तो वो अपने साथी का आधार भी दिखा सकता है। मंदिर समिति रोजाना 300 लोगों का खाना बनाती है। इस पर 9 हजार रुपए का खर्च आता है। यानी महीने में 2 लाख 70 हजार रुपए खर्च हो रहे थे। नई व्यवस्था से भंडारे में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या आधी रह गई है। इससे यह खर्च 1 लाख 80 हजार रुपए में सिमट गया। साथ ही बाहरी श्रद्धालुओं को लाभ भी मिल रहा है।

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