ब्रेकिंग न्यूज़ बीजेपी में सिंधिया की एंट्री से नाराजगी, पार्टी के बड़े नेता प्रभात झा हुए खफा                निर्भया का दोषी पवन पहुंचा कोर्ट, कहा- मुझे पीटने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ दर्ज हो केस                महाराष्ट्र। बुलढाणा के सरकारी स्कूल की छात्रा बनी एक दिन कि डीएम।                  
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने मुख्य सचिव से 15 दिन मे मांगी शालात्यागी बच्चियो की रिपोर्ट।

विदिशा। जहां सरकार बच्चो को पढ़ाई के लिए नई नई योजनाओ के द्वारा शिक्षा देकर देश के विकास के बारे मे विचार कर रही हैं वही मध्यप्रदेश मे बच्चो की शिक्षा की ज़िम्मेदारी संभालने वाले दो विभागो के आंकड़ो के सामने आने पर शिक्षा की तस्वीर को उलटा कर दिया हैं। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने पिछले दिनो विदिशा के ग्रामीणो क्षेत्रो का दौरा किया तो उन्होने आंगनबाड़ियों के रजिस्टर चेक किए औए स्कूल से शालात्यागी बच्चियो की संख्या की जानकारी ली तो प्रदेश मे स्कूल शिक्षा और महिला बाल विकास विभाग के पास मौजूद 11 से 14 साल की स्कूल न जाने वाले बच्चियो की संख्या मे बड़ा अंतर सामने आया हैं। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने  इसको बड़ा घोटाले का इशारा समझते हुई इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य सचिव से 15 दिन मे रिपोर्ट मांगी हैं।

अनुपम राजन, प्रमुख सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग- आयोग मे हमे कुछ बिन्दु बताए है। इस बारे मे शिक्षा विभाग से चर्चा कर परीक्षण करा लिया जाएगा। आंकड़ो मे कुछ अंतर हो सकता हैं, लेकिन प्रथम दृष्टया इसमे अनियमितता जैसी संभावनाए नहीं हैं

 

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सैफु द्घीन सैफी डॉ मीनू पाण्ड्य
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