ब्रेकिंग न्यूज़ नई दिल्ली। प्रधानमंत्री इमरान खान बब्वर शेर है : नवजोत सिंह सिद्धू।                भोपाल। अयोध्या मामले के फैसले के बाद दिग्विजय के टवीट पर बड़ा विवाद।                शाहजहानाबाद। चिन्मयानंद पर यौन शोषण का आरोप लगाने वाली छात्रा को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया।                मप्र / राज्य सरकार ने वैट 5% बढ़ाया, भोपाल में आज से पेट्रोल 2.91 रु. और इंदौर में 3.26 रुपए महंगा                इंदौर। मैं किसी श्वेता को नहीं पहचानता, सबके नाम उजागर होने चाहिए : पूर्व गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह                  
घोटाला.......स्वास्थ्य विभाग के अफसर-कर्मचारियो ने मिलकर अपने नाम किए टीबी मरीजों के लाखो रुपए।

भोपाल। अधिकारी और कर्मचारियो की मिलीभगत से हुए घोटाले आए सामने। गरीब टीबी मरीजों के पोषण आहार के लाखो रुपए स्वास्थ्य विभाग के अफसरो ने किए अपने नाम, खुलासा होने पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन  (एनएचएम) ने प्रदेश के चार जिलों के टीबी मरीजों के खाते किए सीज। पोषण आहार के लाखों रुपए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी -कर्मचारियों ने अपने परिजनों के अकाउंट में ट्रांसफर कर लिए। इस घोटाला के चलते एनएचएम ने प्रदेश के चार जिलों के टीबी मरीजों के खाते सीज कर दिए हैं। स्टेट लेबल कमेटी द्वारा की गई जांच में प्रदेश के सभी जिलों से इस घोटाले के तार जुड़े हुए नजर आ रहे हैं। कई जिलों में मरीजों का पैसा गबन करने के मामले में कर्मचारियों के साथ अफसरों की मिलीभगत भी सामने आ रही है।

ऑनलाइन ट्रांसफर- टीबी मरीजों को इलाज के दौरान उचित पोषण आहार के लिए केंद्र सरकार हर माह पांच सौ रुपए देती है। छह माह में मरीज के अकाउंट में तीन हजार रुपए टांसफर किए जाते हैं। यह पैसा निक्षय सॉफ्टवेयर की मदद से ऑनलाइन ट्रांसफर किया जाता है। शिकायतों के बाद केंद्र सरकार ने सॉफ्टवेयर में रिस्क नाम का फिल्टर लगाया है। इस फिल्टर की मदद से उन खातों की जानकारी सामने आ जाती है, जिनके अकाउंट में तीन हजार से ज्यादा ट्रांसफर हुआ। कटनी, सतना, इंदौर, धार जिलों में तो एक ही कर्मचारी के अकाउंट में दो से ढाई लाख रुपए डालने की जानकारी सामने आई है।

एक ही अकाउंट में लाखों रुपए गए, अधिकारियों को पता ही नहीं चला मरीजों की शिकायत के बाद सामने आए इस घोटाले में विभाग केवल छोटे कर्मचारियों को दोषी मान रहा है, जबकि जानकारों का कहना है कि जिले के वरिष्ठ अधिकारियों की मिली भगत के बिना इतनी बड़ी हेर-फेर संभव ही नहीं है। दूसरी तरफ विभाग ने इन्हीं अधिकारियों को जांच का जिम्मा दे दिया है। बताया जा रहा है कि ये अधिकारी जांच की जगह कर्मचारियों से पैसे की रिकवरी का मामले को रफा-दफा करने की तैयारी में लगे हैं।

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प्रधान संपादक सहायक-संपादक समाचार संपादक
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