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भोपाल-इंदौर के बीच बन रहे एक्सेस कंट्रोल एक्सप्रेस-वे पर अब तक सहमति नहीं बन पायी

भोपाल। भोपाल-इंदौर के बीच बन रहे एक्सेस कंट्रोल एक्सप्रेस-वे की जमीन का अधिग्रहण फरवरी 2020 तक पूरा हो जाएगा। इसके साथ ही भोपाल और इंदौर एक्सप्रेस वे के दोनों ओर भोपाल-इंदौर से सटाकर ही एक इंडस्ट्रियल टाउन भी विकसित करने की तैयारी है। मंगलवार को कंसलटेंसी और प्रोजेक्ट की डीपीआर तैयार करने वाली कंपनी फीडबैक इंस्फ्रास्ट्रक्चर सर्विस प्रा.लि. के चेयरमैन विनायक चटर्जी ने मुख्यमंत्री कमलनाथ के सामने प्रारूप का प्रेजेंटेशन दिया। निर्माण का मॉडल भी तय होना था, लेकिन इस पर सहमति नहीं बना पाई। बैठक में पीडब्ल्यूडी मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, नगरीय विकास मंत्री जयवर्धन सिंह और ऊर्जा मंत्री प्रियवृत सिंह के साथ विभागों के अधिकारी भी मौजूद थे। केंद्र सरकार के स्ट्रेटेजिक एडवाइजर रहे चटर्जी ने सरकार के सामने एक्सप्रेस-वे निर्माण के दो मॉडल हेम और एलपीवीएम रखे। हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (हेम) के तहत प्रोजेक्ट का पूरा पैसा राज्य सरकार को देना है। शुरुआत 40% राशि से होगी। इसके बाद फिक्स किस्तों में पैसा निर्माणकर्ता एजेंसी को देना होता है। इसी तरह लिस्ट प्राइज वैल्यू मॉडल (एलपीवीएम) में कंसेशनायर प्रोजेक्ट पर खर्च होने वाली राशि का अनुमान लगाकर खुद तय करता है कि वह कब तक टोल लेगा। इसमें राज्य सरकार नेगोशिएशन करती है। फिलहाल इन दोनों माॅडल पर सहमति नहीं बनी है। चटर्जी ने बताया कि भोपाल-इंदौर के दोनों ओर भी एक-एक इंडस्ट्रियल टाउनशिप बनेगी। जमीन के अधिग्रहण का काम जल्द शुरू होगा। कोशिश है कि फरवरी तक काम पूरा हो जाए। सरकार और फॉरेस्ट की काफी जमीनें हैं, जिन्हें लेने की तैयारी है।

फीडबैक इंस्फ्रा के चटर्जी ने एक्सप्रेस-वे के साथ निजी इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम का भी प्रेजेंटेशन दिया। यहां बता दें कि कुछ दिन पहले टाटा कंपनी ने रुचि दिखाई थी कि वह विद्युत वितरण की व्यवस्था कर सकती है। सरकार चाहती है कि टीएंडडी लॉस को कम किया जाए। इसी कड़ी में निजी क्षेत्र के हाथों बिजली वितरण की तैयारी है।

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प्रधान संपादक सहायक-संपादक समाचार संपादक
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