ब्रेकिंग न्यूज़ शाहजहानाबाद। चिन्मयानंद पर यौन शोषण का आरोप लगाने वाली छात्रा को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया।                मप्र / राज्य सरकार ने वैट 5% बढ़ाया, भोपाल में आज से पेट्रोल 2.91 रु. और इंदौर में 3.26 रुपए महंगा                इंदौर। मैं किसी श्वेता को नहीं पहचानता, सबके नाम उजागर होने चाहिए : पूर्व गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह                  
नगर पालिका विधि संशोधन अध्यादेश-2019 हुआ लागू।

भोपाल। नगरीय निकायों में अब करीब 20 साल बाद फिर से जनता के बजाय पार्षद महापौर व अध्यक्ष को चुनेंगे। मंगलवार को राज्यपाल लालजी टंडन ने मप्र नगर पालिका विधि संशोधन अध्यादेश-2019 का अनुमोदन कर दिया। अध्यादेश लागू होने पर सरकार का मानना है कि महापौर के चुनाव मे सीधे 30-35 करोड़ रु. बचेंगे। भोपाल में ही करीब 3 करोड़ रुपए चुनाव में खर्च होने का अनुमान रहता है। दरअसल, सरकार ने नगरीय निकाय चुनाव से संबंधित दो बिल राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजे थे। इनमें से पार्षदों द्वारा शपथ-पत्र में गलत जानकारी देने पर जुर्माना व सजा संबंधी अध्यादेश को राज्यपाल ने अनुमोदित कर दिया था, लेकिन अप्रत्यक्ष प्रणाली से महापौर व अध्यक्ष के चुनाव वाला बिल रोक लिया था। इसे लेकर सियासत शुरू हो गई थी। इस बीच कांग्रेस के राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने ट्वीट कर राज्यपाल को राजधर्म का पालन करने की सलाह दे दी। बताया जाता है कि इस पर टंडन ने काफी नाराजगी जताई और अध्यादेश को रोक लिया। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी टंडन से मिलकर अध्यादेश का विरोध किया था। मामला बिगड़ता देख मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सोमवार शाम राजभवन पहुंचकर उनसे मुलाकात की और तन्खा के बयान को उनकी निजी राय बताया। उन्होंने राज्यपाल को बताया कि सरकार का उन विचारों से कोई लेना देना नहीं है। लोकतंत्र में स्वस्थ मर्यादाओं का पालन जरूरी है। राज्य सरकार संवैधानिक मर्यादाओं के प्रति प्रतिबद्ध है। इसके बाद मसला सुलझा और राज्यपाल ने अध्यादेश को मंजूरी दे दी।

लालजी टंडन, राज्यपाल : संवैधानिक पदों के विवेकाधिकार पर टीका-टिप्पणी करना संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन है। राज्यपाल पद की गरिमा, निष्पक्ष और निर्विवादित है। इस पर किसी भी प्रकार का प्रत्यक्ष या परोक्ष दबाव बनाना संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन है। यह कृत्य स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए हानिकारक है। लोकतांत्रिक परंपराओं की गरिमा, निष्पक्षता और निर्विवादित कर्तव्य पालन के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि संवैधानिक पद निष्पक्ष और बिना किसी दबाव के कार्य करे। किसी विषय पर विचारों को व्यक्त करने में संवैधानिक मर्यादाओं का पालन किया जाए।

 

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