ब्रेकिंग न्यूज़ नई दिल्ली। दीपिका उन लोगों के साथ खड़ी हुईं, जो हर सीआरपीएफ जवान की मौत पर जश्न मनाते हैं : स्मृति ईरानी                जयपुर / पुलिस का दावा- इंडियन ऑयल के मैनेजर ने ही पत्नी और 21 महीने के बेटे की हत्या करवाई,                कोलकाता। मैं अकेले ही सीएए और एनआरसी का विरोध करूंगी, पश्चिम बंगाल में इन्हें लागू नहीं होने दूंगी:ममता बेनर्जी                नई दिल्ली। दुष्कर्मी विनय ने सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन दायर की, फांसी पर रोक लगाने की भी मांग की                दिल्ली चुनाव: कांग्रेस बढ़ी तो AAP को टेंशन, घटी तो BJP की वापसी पर लगेगा ग्रहण                  
इंटरनेट पर अनिश्चितकाल के लिए पाबंदी मौलिक अधिकारों का हनन : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में पिछले साल 5 अगस्त से लागू पाबंदियो के खिलाफ दायर याचिकाओं पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा- संविधान के अनुच्छेद-19 के तहत इंटरनेट के इस्तेमाल करना लोगो का जन्मसिद्ध अधिकार माना है। साथ ही कहा कि इंटरनेट पर अनिश्चितकाल के लिए पाबंदी मौलिक अधिकारों का हनन है। जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता वाली तीन जजो की बेंच ने कहा- ‘बोलने की आजादी और भिन्न राय दबाने के लिए धारा 144 इस्तेमाल नहीं की जा सकती है। यह सत्ता का दुरुपयोग कहलाता है। कोर्ट ने कहा- व्यापार, शिक्षा, आजीविका और अभिव्यक्ति के लिए इंटरनेट अहम टूल है। अनिश्चितकाल के लिए इंटरनेट बंद करने का आदेश टेम्परेरी सस्पेंशन ऑफ टेलीकॉम सर्विसेज (पब्लिक सर्विसेज और पब्लिक सर्विस) रूल्स, 2017 के तहत अस्वीकार्य है। पाबंदी अनुच्छेद 19(2) में बताईं शर्तों के अनुसार ही लग सकती है। सरकार आनुपातिकता के सिद्धांत का पालन करे। इंटरनेट के जरिए व्यापार करना भी मूल अधिकार है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कश्मीर में धारा 144 के तहत जारी सभी आदेशो और दूरसंचार सेवाओं समेत इंटरनेट पर पाबंदी लगाने वाले अब तक के सभी आदेश तुरंत सार्वजनिक किए जाएं। भविष्य में भी जारी होने वाले सभी आदेश सार्वजनिक किए जाएं, ताकि लोग इन्हें हाईकोर्ट में चुनौती दे सकें।


Advertisment
 
प्रधान संपादक सहायक-संपादक समाचार संपादक
सैफु द्घीन सैफी राकेश शर्मा डॉ मीनू पांडे
Copyright © 2016-17 LOKJUNG.com              Service and private policy              Email : lokjung.saify@gmail.com