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जल संरक्षण घोषणा पत्र: जल संरचनाओं से जुड़ी जमीनों को प्रदेशभर में चिह्नित किया जाएगा, यह हमेशा के लिए पानी के लिए ही आरक्षित होगी।

भोपाल। मंगलवार को मिंटो हॉल में हुए राष्ट्रीय जल सम्मेलन में मैगेंसेसे पुरस्कार विजेता राजेंद्र सिंह की अध्यक्षता में जल संरक्षण संकल्प का एक भोपाल घोषणा-पत्र जारी किया गया। जिसके द्वारा पानी की जमीन यानी जल संरचनाओं से जुड़ी जमीनों को प्रदेशभर में चिह्नित किया जाएगा। यह हमेशा के लिए पानी के लिए ही आरक्षित होगी। इनका लैंडयूज नहीं बदला जा सकेगा। इसका नोटिफिकेशन होगा। इसके बाद इनका सीमांकन कर अतिक्रमण मुक्त कर संरक्षित किया जाएगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री कमलनाथ, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री कमलेश्वर पटेल और पीएचई मंत्री सुखदेव पांसे भी मौजूद थे।
जहां, मुख्यमंत्री कमलनाथ ने जल संरक्षण को लेकर कहा कि - कानून तो बन जाएगा। कैसा कानून बनाएं- ये विचार आपको करना होगा।   देशभर में 65 बांध सूखने की कगार पर हैं। नदियां भी सूख रही हैं। नई टेक्नोलॉजी से पानी पर लाने विचार करना होगा, जो 20 साल पहले संभव नहीं था वो आज संभव है। अगर हमने अब भी जल संरक्षण पर विचार नहीं किया तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी। उन्होंने राजेन्द्र सिंह से कहा- सामाजिक कर्तव्य के प्रति आप हमारी भावनाओं से जुड़ें। आप तो देशभर में चक्कर काटते हैं, लेकिन अब देश के कम, मप्र के ज्यादा चक्कर लगाइए, ताकि हम कह सकें कि मप्र में पानी की कोई कमी नहीं है।
जल संरक्षण पर झारखंड के विधायक सरयू राय का कहना है कि मप्र में छोटी नदियों का संरक्षण होना चाहिए, क्योंकि बड़ी नदियां छोटी-छोटी नदियों से ही पोषित होकर बड़ी बनती हैं। मप्र पानी के अधिकार का कानून बना रहा है, यदि पानी के अधिकार के लिए भी लोगों को अदालत जाना पड़ जाए तो फिर ऐसे राइट टू वाटर एक्ट का कोई मतलब नहीं होगा। कर्नाटक के प्रख्यात पर्यावरणविद और राजनेता बीआर पाटील ने कहा कि मप्र सरकार राइट टू वाटर को लेकर वास्तव में सीरियस है तो इसे ब्यूरोक्रेट और कॉन्ट्रेक्टर की हाइजैकिंग से बचाकर रखे।


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