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तीसरे पुत्र की “त्रिकाल-दृष्टि” के शिकार होते मजबूत कॉंग्रेस नेता।




भोपाल।(सैफुद्दीन सैफी) मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री और प्रदेश कॉंग्रेस के अध्यक्ष की कुर्सी पर क़ाबिज़ कमलनाथ अक्सर यह कहते पाये गए हैं कि देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री “आयरन लेडी” इन्दिरा गांधी उन्हे राजीव और संजय के बाद अपना तीसरा पुत्र मानती थी। कमोबेश यह सही भी हैं क्योकि कमलनाथ की दून स्कूल की दोस्ती को प्राथमिकता देते हुये इन्दिरा गांधी उन्हे यही मान देती थी। शायद यही कारण हैं कि इन्दिरा जी के कुछ राजनीतिक गुणों-अवगुणों को कमलनाथ ने भी आत्मसात कर लिया हैं। उदाहरण के बतौर अपने आस-पास काकस का घेरा बनाना। जिस तरह इन्दिरा जी को आर॰के॰ धवन, वीसी शुक्ला, भगत आदि मंडली काकस की तरह घेरे रहती थी ठीक उसी तरह कमलनाथ ने भी अपने आसपास चाटुकार मंत्रियो तथा चुनिंदा नौकरशाहों का दायरा बना रखा हैं। सरकार के फैसलो मे उन्ही मंत्रियो की चलती हैं जो कमलनाथ की गुडबुक्स मे हैं। गांधी परिवार के प्रति अपनी अगाध श्रद्धा भक्ति दिखाने के प्रयास मे वह प्रदेश से प्रियंका गांधी को राज्यसभा मे भेजने की जुगत मे हैं। उसके लिए वे कॉंग्रेस के दिग्गज-नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को लगातार नजरंदाज किए जा रहे हैं। कमलनाथ ने प्रदेश अध्यक्ष पद के सशक्त दावेदार कांतिलाल भूरिया और ज्योतिरादित्य सिंधिया को हाशिये पर डालकर रखा हैं। सिंधिया समर्थित मंत्रियो पर अंकुश लगा कर रखा हैं। मीडिया के समक्ष वही मंत्री (पीसी शर्मा,सज्जन सिंह वर्मा, गोविंद सिंह) आते हैं, जो कमलनाथ की इच्छापूर्ति करते हैं। पार्टी का मुखर प्रवक्ता उन्होने अपने बायें हाथ नरेंद्र सलूजा को बना रखा हैं, जबकि शोभा ओझा यदा-कदा ही परिदृश्य पर दिखाई देती हैं। अपने एक साल के कार्यकाल मे कमलनाथ ने न तो अपने मंत्री मण्डल का विस्तार किया हैं और न ही निगम मंडलो मे रिक्त पड़े पदो को भरने की पहल की हैं। उनकी इस लेतलाली की वजह से अधिकांश कॉंग्रेसी विधायक असंतुष्ट चल रहे हैं। यह असंतुष्ट विधायक सबसे कम बहुमत वाली कमलनाथ सरकार के लिए खतरा बन सकते हैं। पार्टी का आम कार्यकर्ता कमलनाथ से सीधे नहीं मिल सकता, क्योकि उनके बाउंसर कार्यकर्ताओ को धकियाते हैं। कार्यकर्ताओ की उपेक्षा, वचन-पत्र मे किए गए वादो को निभाने मे विफलता, विधायको मे असंतोष व गुटबाजी यदि कॉंग्रेस का बेड़ागर्क करती हैं तो इसके लिए कमलनाथ ही उत्तरदायी होंगे। इन्ही हालातो के चलते निकट भविष्य मे होने वाले स्थानीय निकाय चुनाव कमलनाथ सरकार के लिए लिट्मस टेस्ट साबित हो सकते हैं। शायद यही वजह हैं की भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश कि गड्डमड्ड राजनीतिक परिस्थितियो को देखते हुये, नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति की हैं




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