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जीवन रेखा अस्पताल........नाम तो जीवन रेखा, हड्डी जोड़ी टेढ़ी

भोपाल। जीवन रेखा अस्पताल मे 7 सात पहले मरीज की गलत तरीके से हड्डी जोड़ने वाले मामले मे अब आया कोर्ट का फैसला, अस्पताल को दो माह मे देना होगा मरीज को 10 लाख रु का हर्जाना और 5 हजार रु फरियादी व्यय देने के आदेश।

पुतलीघर निवासी मेहजबी लतीफ़ ने बताया कि 11 अक्टूबर 2012 को उनका एक्सीडेंट हुआ था। तब दाए पैर मे फ्रेक्चर हो गया था। इसके बाद शाहजहानाबाद स्थित जीवन रेखा अस्पताल मे 15 अक्टूबर 2012 को ऑपरेशन कर प्लास्टर चढ़ा दिया गया। ऑपरेशन के एक हफ्ते बाद उन्हे डिस्चार्ज कर दिया गया। मेहजबी लतीफ़ दो महीने बाद प्लास्टर कटवाने अस्पताल पहुंची, डॉक्टर ने प्लास्टर तो काट दिया, लेकिन एक्सरे नहीं किया। कुछ दिनो बाद जब मेहजबी के पैर का दर्द ठीक नहीं हुआ तो उन्होने हमीदिया मे दिखाया, जहां डॉक्टर ने जांच के बाद बताया कि हड्डी गलत जोड़ दी गई हैं, इसी कारण उनके पैर मे दर्द हैं। दोबारा ऑपरेशन करना पड़ेगा, नहीं तो पैर फिर से टूट सकता हैं। जब जीवन रेखा अस्पताल मे मामले की जानकारी दी और इलाज के लिए पहुंचे तो उन्होने अपनी गलती मनाने कि जगह मरीज से इलाज के लिए 2 लाख रु॰ पहले जमा कराने को कहा। इसके बाद मेहबजी 27 फरवरी 2013 को हमीदिया गई और वहाँ भर्ती हो, अपने पैर का ऑपरेशन कराया। ऑपरेशन के बाद उन्हे 1 अप्रैल 2013 को डिस्चार्ज कर दिया गया। 

डॉक्टर ने कहा मरीज ने निर्देशों का पालन नहीं किया- एडवोकेट सोमेन्द्र सक्सेना ने बताया कि इस मामले मे हमीदिया ने रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसमे बताया गया हैं मरीज जब हमीदिया अस्पताल भर्ती हुई, तब उनके पैर कि स्थिति असामान्य थी। यह असामान्यता किस कारण हुई इसकी जानकारी नहीं दी गई। वही, हमीदिया अस्पताल के द्वारा फोरम मे पेश की गई रिपोर्ट मे बताया गया कि डॉक्टर के निर्देशों का पालन नहीं करने के चलते मरीज को तकलीफ हुई। साथ कहा गया कि फरियादी अस्पताल मे भर्ती होने के दौरान संतुष्ट नहीं थी। इसी के चलते वह हमीदिया मे इलाज कराने पहुंची। जबकि हमीदिया अस्पताल के डिस्चार्ज पेपर पर लिखा था कि पैर मे इंप्लांट हुआ वह फेल हो गया था। मरीज को पैर मे इन्फेक्शन हो गया था, जिस कारण से दोबारा ऑपरेशन करना पड़ा।

7 अक्टूबर 2013 को जीवन रेखा अस्पताल के खिलाफ फोरम मे केस दर्ज किया गया। बेंच के अध्यक्ष आरके भावे सदस्य सुनील श्रीवास्तव और क्षमा चौरे ने मामले कि सुनवाई की। दोनों पक्षो की टिप्पणी के बाद फैसला फरियादी के पक्ष किया गया जहां अस्पताल को 10 लाख हर्जाना और 5 हजार रु परिवाद व्यय देने का आदेश जारी किया।    

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