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एसआईटीई द्वारा आयकर विभाग को सौंपे दस्तावेजो से कई पन्ने गायब

इंदौर।  महीनो मे चर्चा मे बना हनीट्रेप मामले मे सोमवार को हाईकोर्ट ने केस के नियुक्त ऑफिसर को फटकार लगाते हुये कहा कि यही 16 मार्च केपहले कोर्ट ने जवाब के तौर पर स्टेटस रिपोर्ट पेश नहीं की गई तो एसआईटी चीफ राजेंद्र कुमार को खुद कोर्ट मे पेश होकर स्टेटस रिपोर्ट पेश न होने का कारण बताना होगा।  

दरअसल, हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई में निर्देश दिए थे कि एसआईटी केस की स्टेटस रिपोर्ट पेश करे। क्यों न केस सीबीआई को सौंप दिया जाए, इस पर सीबीआई भी अपना अभिमत दे। हाईकोर्ट ने सोमवार को इन्हीं सवालों पर बात की। सोमवार को जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने मामले की सुनवाई शुरू की तो इस केस में नियुक्त ऑफिसर इन चार्ज (ओआईसी) एसपी अवधेश गोस्वामी से कोर्ट द्वारा पूछा गया कि - स्टेटस रिपोर्ट कहां है? तो एसपी गोस्वामी ने जवाब दिया- सर, रिपोर्ट तो नहीं लाए? इस पर जजों ने उन्हें फटकार लगाई और कहा- फिर आप यहां आए क्यों? यदि 16 मार्च के पहले कोर्ट में जवाब पेश नहीं किया तो एसआईटी चीफ राजेंद्र कुमार खुद कोर्ट में आकर इसका कारण बताएं।

एसआईटी ने नहीं सौंपे आयकर विभाग को सारे दस्तावेज़:

 कोर्ट मे सुनवाई के दौरान आयकर विभाग के अधिकारियों ने बताया कि उन्हे अभी एसआईटी की ओर से सारे दस्तावेज़ नहीं सौंपे गए हैं, जो भी दस्तावेज़ सौंपे गए हैं उनमे इस केस की महिला आरोपियों और अफसरों के बीच हुए लेन-देन के जो दस्तावेज दिए हैं, वे सब अधूरे हैं।  कई दस्तावेजों के बीच से कुछ पेज गायब हैं, जिनसे लेन-देन की कड़ी नहीं जुड़ पा रही। ऐसे में जांच संभव नहीं है। इलेक्ट्रानिक गैजेट्स की जानकारी भी एसआईटी ने नहीं दी। आयकर विभाग अधिकारियों से हाई कोर्ट ने कहा- कि वे बताएं किस ओर तरह के दस्तावेज नहीं मिल रहे। 

तीन याचिकाएं...  

पहली : दिग्विजय भंडारी की अर्जी केस सीबीआई को सौंपने, जांच अधिकारी बार-बार बदलने पर। 
एसआईटी का जवाब : अतिरिक्त महाधिवक्ता रवींद्र सिंह छाबड़ा ने कोर्ट से कहा- हम पूर्व में ही इस पर जवाब दे चुके हैं, अब नया जवाब नहीं देंगे।
दूसरी : शिशिर मिश्रा की अर्जी में सीबीआई जांच की मांग और एसआईटी चीफ बार-बार बदलने को लेकर आपत्ति।
तीसरी : अभी सीबीआई की ओर से कोई कोर्ट में नहीं है। 16 मार्च की सुनवाई में सीबीआई एसपी कोर्ट में हाजिर हों।

 

कोर्ट को एसआईटी का जबाव –: ओआईसी अवधेश गोस्वामी के जरिए एसआईटी की ओर से जवाब पेश किया गया है कि जितनी भी जनहित याचिकाएं लगी हैं वह दरअसल, पब्लिसिटी इंटरेस्ट याचिकाएं हैं। अपना नाम सुर्खियों में लाने के लिए याचिका लगाई हैं। सभी याचिकाएं केवल सूचना और बातों के आधार पर पेश की गई है। सटीक दस्तावेज नहीं हैं। याचिकाओं में मांग की गई है कि मामले से जुड़े सभी वीडियो रिकॉर्ड कोर्ट में तलब कर सुरक्षित रखे जाएं। सीबीआई को केस सौंप दिया जाए। घटना के खुलासे से पहले वल्लभ भवन में आए सभी विजिटर्स का रिकार्ड सीज किया जाए।

इस पर हमारा बिंदुवार जवाब यह है कि हाई कोर्ट द्वारा 31 अक्टूबर 19 को सभी दस्तावेज फॉरेंसिक जांच के लिए हैदराबाद भिजवा दिए गए। लैब के प्रभारी ने डीजीपी को पत्र भी भेजा है कि जो दस्तावेज जांच के लिए भेजे हैं। उनकी जांच 8 से 10 महीने में पूरी हो सकेगी। रही बात केस सीबीआई को सौंपे जाने की तो हाई कोर्ट खुद एसआईटी के द्वारा उठाए गए कदमों की प्रशंसा कर चुकी है। याचिका में वल्लभ भवन का रिकार्ड जब्त किए जाने संबंधी कोई ठोस कारण नहीं दिए गए हैं। यह मामला याचिका और घटना का हिस्सा भी नहीं है। इसलिए रिकार्ड जब्त नहीं किया जा सकता।



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प्रधान संपादक समाचार संपादक
सैफु द्घीन सैफी डॉ मीनू पाण्ड्य
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