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बाल विकास विभाग द्वारा 76 हजार स्मार्ट फोन की खरीदी विवाद मे घिरी

भोपाल। अपने अधिकारी और कर्मचारियो के लिए स्मार्ट फोन खरीदने के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा चयनित कंपनी के फैसले को लेकर मोबाइल की खरीदी विवाद मे पड़ गई हैं।

दरअसल, 76 हजार 263 मोबाइल फोन की खरीदी विभाग जेम पोर्टल के बजाय मप्र लघु उद्योग निगम के माध्यम से करने जा रहा हैं।  इसके लिए देश की जानी-मानी तीन कंपनियो ने हिस्सा लिया। तीनों कंपनियो ने अपने उत्पादो की जांच कराने के लिए उत्पाद का सेंपल नेशनल एक्रीडेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड लेकीब्रेशन के पास भेजा। एनएबीएल की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही तीन कंपनियो मे से एक कंपनी का चयन किया गया। लेकिन, 22 फरवरी को दूसरी कंपनी द्वारा एनएबीएल की जांच रिपोर्ट के खिलाफ एक लिखित शिकायत मुख्यमंत्री और महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्री को को भेजी गई। जिसके कंपनी का आरोप लगाया कि जिस रिपोर्ट के आधार कर हमे बाहर और दूसरी कंपनी को यह टेंडर दिया गया हैं वह रिपोर्ट ही गलत हैं। कंपनी ने सीधे तौर पर लघु उद्योग निगम की प्रक्रिया पर ही सवाल उठाए हैं उंककहना हैं की निगम के अफसर दस्तावेजो की जांच कर रहे हैं शिकायत पत्र के साथ शिकायत कंपनी ने कुछ तकनीकी पहलुओ के दस्तावेज़ भी मंत्री को दिये हैं। जिसके बताया गया हैं कि

  • Ø यूएनआर नंबर गलत- टेंडर मे शामिल पहली कंपनी कि तरफ से जो रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, उसके यूएनआर को गलत बताया जा रहा हैं। नियमानुसार यूएलआर नंबर के आखिर मे पी होना चाहिए, लेकिन चयनित कंपनी की रिपोर्ट मे एफ लिखा हुआ हैं।
  • Ø बिन्दु क्रमांक 52,53 और 54 मे एनएबीएल एक्रीडेशन लैब की तरफ से फोन और बैटरी की वारंटी दो साल बताई गई हैं, जबकि तय मानक मे नहीं हैं। यह केवल मोबाइल बनाने वाली कंपनी की तरफ से की जानी चाहिए थी।
  • Ø ब्रिन्दु क्रमांक 19 मे मोबाइल फोन के स्पेसिफिकेशन मे ग्लास के प्रकार मे केवल यह लिखा हैं।

ऐसे ही कई बिन्दुओ पर सवाल उठाए गए हैं।

इस मामले मे जब विभागीय मंत्री इमारती देवी से शिकायत के बारे मे पूछा गया तो उन्होने सर्विस सेंटर का हवाला देते हुये चयनित कंपनी का समर्थन किया। वही लघु उद्योग निगम एक अफसर से बात कि तो उन्होने ने किसी भी प्रकार की जानकारी होने से साफ इंकार कर दिया।

 

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प्रधान संपादक समाचार संपादक
सैफु द्घीन सैफी डॉ मीनू पाण्ड्य
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