ब्रेकिंग न्यूज़ इंदौर पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन की तबियत में सुधार                मुबई ग्लोबल मार्केट में तेजी के कारण बढ सकते हे खाद्द्य तेलों के दाम                भोपाल सिपाही रितेश यादव ने दर्द से परेशां होकर की ख़ुदकुशी                भोपाल संकट समय केन्द्रिये मंत्री से युवक ने आक्सीजन मांगी मंत्री पटेल ने कहा दो खाओगे                भोपाल पुलिस दुआरा मनमर्जी से बैरिगेट्स लगाने को लेकर जनता में गुस्सा                भोपाल दस दिनों में करोना से दस शिक्षकों की मौत,आयुक्त ने जानकारी बुलवाई                भोपाल खाना बनाते समय महिला आग से झुलसी                भोपाल डॉ ने सफाईकर्मी महिला को मारा थप्पड़ कर्मचारी गए हड़ताल पर                बीजेपी में सिंधिया की एंट्री से नाराजगी, पार्टी के बड़े नेता प्रभात झा हुए खफा                निर्भया का दोषी पवन पहुंचा कोर्ट, कहा- मुझे पीटने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ दर्ज हो केस                  
फर्जी अस्पताल के नाम पर सबसे ज्यादा कोविशील्ड डोज़ का आदेश

प्रदेश मे ऐसा पहला वाक्या सामने आया है कि एक जबलपुर के फर्जी नाम के किसी मैक्स हेल्थ केयर इंस्टीट्यूट से 10 हजार कोविशील्ड का आदेश सीरम इंस्टीट्यूट को दिया गया है। इतना बड़ा आदेश किसी निजी अस्पताल द्वारा ही किया जा सकता है। इस आदेश मे प्रदेश मे हलचल मच गयी है। वैक्सीन देने से पहले भोपाल से मिले निर्देश के बाद स्थानीय वैक्सीनेशन अधिकारी और सीएमएचओ को जांच  करने को कहा गया। जिसमे पता चला कि जबलपुर मे इस नाम का कोई अस्पताल मौजूद नहीं है लेकिन इस नाम से आदेश दिया गया है, परंतु इस नाम के अस्पताल का कोई पता नहीं है। आखिर ये आदेश क्यो दिया गया है, और इस आदेश कि पूर्ति हुई है या नहीं इसका कुछ मालूम नहीं चल रहा है। इस घटना का पता स्वास्थ विभाग द्वारा जबलपुर के निजी अस्पतालों का एक वॉट्सएप ग्रुप बनाया है। जो वैक्सीन खरीदना चाहते है वे इस गुरप मे मोजूद सीरम इंस्टीट्यूट के नंबर पर सीधा कॉल कर सकते है। और जो भी आदेश होगा उसकी जानकारी टीकाकरन अधिकारी को देनी होगी, और जब इस आदेश कि एनओसी मिलेगी तब इस आदेश को पूर्ण किया जाएगा। अधिकारी  डॉ॰ एस के दहिया के मुताबिक मैक्स इंस्टीट्यूट से जब आदेश मिला तो इसकी सूचना भोपाल तक पहुँच गयी। और 25 मई को भोपाल से जानकारी मांगी गयी,और 3 दिन मे स्वास्थ विभाग ने अस्पताल के बारे खोज खबर निकाली और जब कोई भी सुराग,जानकारी नहीं मिली तो भोपाल को कह दिया गया। कि ऐसा कोई भी अस्पताल नहीं है।

 

 

Advertisment
 
प्रधान संपादक समाचार संपादक
सैफु द्घीन सैफी डॉ मीनू पाण्ड्य
Copyright © 2016-17 LOKJUNG.com              Service and private policy              Email : lokjung.saify@gmail.com