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ब्लैक फंगस के मरीज का दर्द से चेहरा बिगड़ा

भोपाल

 प्रदेश मे कई लोग ऐसे है जिन्होने दोनों महामारी से डट कर मुक़ाबला कर उसे हराकर अपने

अपने घर लौट गए है। ये हकीकत उनलोगों की है, जो न तो कोरोना से डरे है और ना ही ब्लैक फंगस से कुछ लोगों का चेहरा खराब हो गया।तो किसी को पेरालिसिस भी हो गया है। पर ये लोग नहीं घबराए। इनमे से किसी की एक सर्जरी बाकी है तो किसी को अभी भी चेहरे पर सूजन है। लेकिन इन लोंगों को विश्वास है कि सब धीरे-धीरे ठीक हो जाएगा। शहर में ऐसे जो मरीज है जिन्होने दोनों महामारी के साथ –साथ अन्य बीमारियों को भी हराया है। इधर सुमित्रा दांगी ने बताया कि 45 वर्ष से उन्हे कभी कोई भी बीमारी नहीं हुई। और तो घर में बेटी की शादी  8 मई को थी। इसलिए परिवार के सभी सदस्य उसकी तैयारी मे लगे थे, मुझे शुगर है मुझे एकदम अचानक से 1 मई को बुखार आया। डॉक्टर को दिखाया तो दवाई दी लेकिन फिर 2 मई को  बहुत तेज सर में दर्द हुआ सोचा ठीक हो जाएगा परंतु नहीं हुआ तो 3 मई को मेरा बेटा मुझे अस्पताल ले गया। डॉक्टर ने जांच के बाद नाक के पास कुछ काला देखा। तो उन्होने बताया कि फंगस हो गया है। जांच कारवाई तो नाक के साथ आँख के नीचे भी फंगस पाया गया है। उसके बाद निजी अस्पताल के डॉक्टर ने नाक कि फंगस ऑपरेशन से निकाल दी है , अभी आँख का ऑपरेशन होना बाकी है में जानती हूँ। कि ब्लैक फंगस ने मेरा चेहरा बिगाड़ दिया है। लेकिन मुझे यकीन है कि महामारी से में नहीं हारूगी। और ऐसे ही विश्वनाथ सारंग के साथ हुआ कि 10 अप्रैल को उन्हे बुखार आया और जांच करवाई तो वह कोरोना पॉज़िटिव आई। फिर वह होम आइसोलेशन मे रहे, और 19 अप्रैल को उनका ऑक्सीज़न लेवल कम हो गया। फिर बेटा मुझे करोंद स्थित शुभाम हॉस्पिटल मे ले गया मुझे इलाज सूट नहीं हुआ फिर बेटा मुझे राजगढ़ ले गया। वह से 2 मई को दिछरगे हुआ और तीन मई को आँख मे दर्द हुआ ओर फिर हमीदिया अस्पताल में बाई आँख का ऑपरेशन हुआ।और उसी तरफ मुझे लकवा हो गया। और तभी सारे इलाज शुरू हो गए। ऑपरेशन के बाद से मेरी आई बॉल मूव नहीं करती है। भगवान का शुक्र है कि मेरी आंखो कि रोशने नहीं गई है। इसी तरह में लकवे को भी हरा दूंगा।

और इसी तरह अनिल मिश्रा ने भी बताया कि उन्होने किन किन बीमारियो को एक साथ हराया है। उन्होने बताया कि वह एक प्राइवेट कंपनी मे कार्यरत है और उनको 3 साल से शुगर भी है काम के दोरान 3 मई को कोरोना पॉज़िटिव हो गए थे तो डॉक्टर ने उनको होम आइसोलेशन मे रहने कि सलाह दी थी उसके बाद 8 वे दिन एक डैम से सर मे दर्द हुआ। और दर्द भी असहनीय था । 14 को हमीदिया में भर्ती हुये और इस दोरान आँख और गाल पर सूजन आगयी। जांच के बाद डॉक्टर ने स्थिति को देखते हुये तुरंत ऑपरेशन किया जिसकी वजह से मेरी आँख तो बच गई है। 27 मई को डॉक्टर ने डिस्चार्ज कर दिया है। अब मे पूर्ण रूप से स्वस्थ हूँ।

 

 

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प्रधान संपादक समाचार संपादक
सैफु द्घीन सैफी डॉ मीनू पाण्ड्य
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