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मध्य प्रदेश के मई माह में मौत की सबसे ज्यादा लहर

भोपाल

सीआरएस के तहत ऑफिस ऑफ रजिस्ट्रार जनरल इंडिया, देशभर में जन्म मृत्यु का हिसाब रखता है। सभी राज्यों को सीआरएस पर मौत और जन्म का आंकड़ा दर्ज करना होता है। भारत में हुई 86% और मप्र॰ में हुई 80%मौतें यहाँ दर्ज होती है। सिर्फ सीआरएस का ऑल-कॉज़ मॉर्टेलिटी डेटा ही अतिरिक्त मौतों की संख्या का इकलौता विश्वसनीय अनुमान देता है। ये हर मौतों का रिकॉर्ड रखता है। चाहे कहीं भी, किसी भी कारण से हुई हों,भले ही उन मृत्यु का प्रमाण पत्र हो या ना हो। ओर इधर मई मे मप्र॰ में 1.7 लाख मौतें हुई है। पहली बार सरकारी डेटा में इन मौतों का रिकॉर्ड दर्ज (हिसाब) मिला है।सरकारी डेटा के मुताबिक यह हर साल मई में होने वाली मौतों की संख्या से 4 गुना ज्यादा है।  इस साल जनवरी से मई के बीच पिछले साल की अपेक्षा 1.9 लाख ज्यादा मौतें हुई है। राज्य में मई,2019 मे 31 हजार और 2020 में 34 हजार जानें गयी थी। परंतु देश भर मे लॉकडाउन के दोरान अप्रैल 2020 में मौतों की संख्या में कमी हुई। लेकिन 2021 में तेजी से बढ़ गई।  और मई मे छह महीने के बराबर मौतें हुई है। लेकिन ये जरूरी नहीं मौते कोविड से हुई है। भोपाल में अप्रैल-मई 2019 में 528,व 2020 में 1204, और 2021 में 11045 मौतें हुई है। वहीं इंदौर मे अप्रैल-मई में 19 हजार लोगों की जान गयी है। पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा मौतें इंदौर में हुई है। पर ये मौतों के आंकड़े इंदौर और भोपाल तक ही सीमित नहीं है बल्कि ये छिंदवाड़ा, जैसे ग्रामीण आबादी वाले जिले में भी दर्ज हुई मौतों की संख्या काफी ज्यादा है। मप्र॰ मे इस साल 3.5 लाख मौते हुई है। वही भोपाल मे पिछले साल से ज्यादा मौतें हुई है। भोपाल के बाद छोटे शहरो जैसे की मंदसोर, होशंगाबाद, नीमच, शाजापुर में सबसे ज्यादा जानें गई है। इनमे से कई मौते कोरोना से हुई है, और उन्ही मौतों को कोरोना से माना जा रहा है जो की कोरोना का टेस्ट करने पर कोरोना पॉज़िटिव आई है। इंदौर मे अप्रैल - मई 2021 में सबसे ज्यादा मौतें हुई। और इंदौर के बाद भोपाल, जबलपुर, उज्जैन और छिंदवाड़ा जिलों में सबसे ज्यादा मौतें हुई है।

 

 

 

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