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हमीदिया अस्पताल में बजट का टोटा : न दवाइयां मिल रही और न ज़रूरी जांचे हो पा रही मरीजों को प्राइवेट जांचे करानी पड़ रही, इलाज के साथ-साथ ऑपरेशन भी हो रहे प्रभावित |

भोपाल :(नुजहत सुल्तान ) हमीदिया अस्पताल में मरीजों को जाँचों को लेकर दिक्कत का सामना करना पड़ रहा हैं अभी तक तो सिर्फ दवाइयों का ही टोटा था, लेकिन अब तो ज़रूरी जांचे भी नहीं हो पा रही हैं | ऐसे मे मरीजों के परिजनों को बाहर के निजी लैब से जांचे करानी पड़ रही हैं किसी के पास जाँचों के पैसे न होने के कारण उनका इलाज रुक जाता हैं और कई लोगो की तो जान भी चली जाती हैं | हमीदिया कहने को तो भोपाल का बहतरीन अस्पताल हैं लेकिन यहां मरीजों को सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो रही हैं | दवाइयों के साथ-साथ अब यहां जाँचों की परेशानी शुरू हो गई हैं हालात यह बने हुए हैं कि इमरजेंसी में आने वाले मरीजों की बेहद ज़रूरी जांचे इलेक्ट्रोलाइट और एबीजी जांच के अलावा क्रेटिनिन और सीआरपी जैसी सामान्य जांचे भी नहीं हो रही हैं | इस संबंध मे जब जिम्मेदारों से सवाल किए गए तो उन्होने बताया कि बजट की कमी के कारण रीएजेंट का टोटा हो गया हैं  ज़रूरत के हिसाब से बजट नहीं मिल रहा हैं | पिछले दिनों अधीक्षक कार्यालय की और से चार करोड़ रु. के बजट की डिमांड चिकित्सा विभाग को भेजी गई थी, पहले तो फाइल इधर-उधर रुकी रही, फिर डीएमई की तरफ से इस पर स्वीकृति दी गई, तो 40 लाख रु. यानि डिमांड का सिर्फ 10% ही बजट दिया गया | गंभीर हालत में लाए गए मरीजों के लिए होने वाली बेहद जरूरी जांच भी नहीं हो पा रही हैं, इमरजेंसी वार्ड के एक सर्जन ने बताया कि जब कोई मरीज गंभीर हालत मे आता हैं तो हमें यह जानना ज़रूरी होता हैं कि उसके ब्लड मे पाए जाने वाले इलेक्ट्रोलाइड अनबेलेंस तो नहीं हुए हैं जांच के आधार पर उस स्थिति को संभाला जाता हैं | इस प्रकार की बेहद जरूरी जांच इलेक्ट्रोलाइट भी नहीं हो पा रही | इस तरह इलाज तो प्रभावित होता ही हैं ऑपरेशन भी आगे बढ़ाने पड़ते हैं |  

 

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सैफु द्घीन सैफी डॉ मीनू पाण्ड्य
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