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रेलवे में हो रही दलालों की मनमानी पर कोई रोक नहीं, ट्रेन से बाइक दिल्ली भेजने का खर्च जहां 1600 रु. वहीं दलाल वसूल रहे दोगुनी कीमत रेलवे स्टाफ की मिलीभगत का अंदेशा |

भोपाल : 01/07/2024 :( सैफुद्दीन सैफी) रेलवे पार्सल कार्यालयों में दलालों की होने वाली मनमानी पर कोई रोक टोक नहीं है वह अपनी मर्ज़ी मुताबिक लोगों से पार्सल के पैसे वसूल रहे हैं | यहां दलालों की बिना इजाज़त किसी भी सामान की बुकिंग या फिर निकासी करना मुश्किल है | पार्सल दफ्तर में तैनात अफसर खुद काम न करते हुए लोगों को दलालों के पास भेजते हैं | दलाल यहां बाइक दिल्ली तक पहुंचाने के 3200 रु. लेते हैं जबकि रेलवे में इसकी कीमत सिर्फ 1600 रु. है | रेलवे द्वारा भोपाल से रोज़ 20 से 30 दो पहिया वाहन विभिन्न राज्यों के लिए भेजे जाते हैं ऐसे में इन वाहनों के पार्सल का जो किराया रेलवे लेता है, दलाल उससे दो से तीन गुना तक वसूलते हैं लेकिन रेलवे स्टाफ भी इन्हें रोकने की कोशिश नहीं करता  इतना ही नहीं बल्कि रेलवे स्टाफ आम लोगों की बुकिंग करने से पहले दलालों द्वारा भेजे गए वाहनों की बुकिंग को ज़्यादा तरजीह देता है | इस तरह लोगों के साथ धड़ल्ले से ठगी हो रही है, लेकिन रेलवे अफसर इन दलालों को रोकने के बजाय उनका साथ दे रहे हैं | गौरतलब है कि पार्सल बुकिंग के दो मोड हैं, पहला रेलवे द्वारा बुकिंग की जाती है जिसमें कम खर्च आता है और दूसरा रेलवे ने लीज पर भी बुकिंग का काम दिया है, जो मार्केट रेट पर होता है | हालांकि पार्सल बुकिंग कार्यालय के बाहर न तो लगेज के भार के हिसाब से रेट लिस्ट लगी है और न ही लीज के संबंध में कोई जानकारी | अब सवाल ये है कि अगर रेलवे ने पार्सल बुकिंग काम लीज पर भी दिया है तो क्या दलाल पार्सल बुकिंग कार्यालय के अंदर ही एक्टिव हो जाएंगे ? इसका जवाब रेलवे के किसी अफसर के पास नहीं है |  जब इस संबंध में रेल मंडल के पीआरओ नवल अग्रवाल से पूछा गया तो उनका कहना था कि लीज होल्डर के कर्मचारियों को पार्सल बुकिंग कार्यालय के अंदर तो नहीं होना चाहिए | इन्हें पार्सल बुकिंग कार्यालय परिसर में ही कोई जगह दी जाती है | इस संबंध में जांच करवाकर दलालों के खिलाफ आगे की कार्यवाही करेंगे और अगर इसमें रेलवे स्टाफ की मिलीभगत पाई गई तो उन पर भी सख्ती बरती जाएगी |

 

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प्रधान संपादक समाचार संपादक
सैफु द्घीन सैफी डॉ मीनू पाण्ड्य
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